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Monday, January 23, 2012

एफडी, इन्फ्रा बांड और होम लोन भी बचाते हैं कर


फायदा किस तरह से
आयकर अधिनियम की धारा 24 (बी) के तहत हाउसिंग लोन के ब्याज के पुनर्भुगतान पर 1,50,000 रुपये तक की कटौती है मान्य
धारा 80सी के तहत होम लोन के मूलधन भुगतान पर एक लाख रुपये तक की कर छूट मिलती है
धारा 80 सीसीएफ के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश कर 20,000 रुपये की अतिरिक्त आयकर छूट का लाभ उठा सकते हैं आप

आयकर में बचत के लिए पिछले दिनों हमने प्रमुख रूप से धारा 80सी की चर्चा की। टैक्स सेविंग वाले बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), जिनकी लॉक-इन अवधि पांच वर्षों की होती है, धारा 80सी के दायरे में ही आती है। मौजूदा समय में आप 9.25 फीसदी तक ब्याज इस तरह की एफडी पर पा सकते हैं।

आर्क फाइनेंशियल प्लानर के सीईओ और सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर हेमंत बेनीवाल कहते हैं कि कर बचत का यह विकल्प उन निवेशकों के लिए अच्छा है जिनका लक्ष्य अल्पावधि का है या जो इक्विटी से जुड़े निवेश विकल्पों का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। न्यूनतम कर वर्ग में आने वाले निवेशकों के लिए भी यह विकल्प हो सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि निवेश की जाने वाली राशि पर आयकर का लाभ मिलता है, लेकिन इन एफडी से प्राप्त होने वाले ब्याज पर कर लगता है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड्स : धारा 80 सीसीएफ के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश कर आप 20,000 रुपये की अतिरिक्त आयकर छूट का लाभ उठा सकते हैं। हाल ही में कई कंपनियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड लांच हुए थे। एल एंड टी, आईडीएफसी और श्रेई इन्फ्रा के लांग टर्म इन्फ्रा बांड्स इश्यू अब भी खुले हुए हैं। इन पर रिटर्न भी आकर्षक हैं। धारा 80सी के अलावा कर में कटौती के लाभ के वास्ते धारा 80सीसीएफ का लाभ उठाने के लिए इसमें 20,000 रुपये तक का निवेश किया जा सकता है।

होम लोन के मूलधन और ब्याज का भुगतान : धारा 80सी के तहत होम लोन के मूलधन भुगतान पर एक लाख रुपये तक की कर छूट मिलती है। इसका दावा करने के लिए आपको कर्जदाता से स्टेटमेंट लेना जरूरी होता है। आयकर अधिनियम की धारा 24 (बी) के तहत हाउसिंग लोन के ब्याज के पुनर्भुगतान पर 1,50,000 रुपये तक की कटौती मान्य है।

अपनापैसा डॉट कॉम के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर बलवंत जैन कहते हैं, हालांकि इस बारे में एक शर्त यह है कि घर का निर्माण या उस घर पर लोन लेने वाला व्यक्ति कर्ज लेने के तीन वर्षों के भीतर घर का पजेशन ले ले, अन्यथा ब्याज पर दी जाने वाली 1,50,000 रुपये तक की कटौती घटकर महज 30,000 रुपये रह जाएगी। अपने घर की मरम्मत, पुनर्निर्माण या विस्तार के लिए अगर आपने लोन लिया है तो आप धारा 24 (सी) के तहत ब्याज में कटौती के दावेदार होंगे। इसके अंतर्गत कटौती सीमा 1.5 लाख रुपये है।

धारा 24 (सी) और दूसरा घर: जैन कहते हैं कि अगर आप दो घरों के मालिक हैं, जिसमें से एक मकान को आपने किराये पर दे रखा है तो ऐसे में हाउसिंग लोन पर ब्याज में आयकर कटौती की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

आपके द्वारा ब्याज के तौर पर दी जाने वाली पूरी राशि भी कटौती के दायरे में आ सकती है। याद रखें, आपको अपनी कुल आय में उस मकान से मिलने वाले किराये की राशि को भी जोडऩा होगा। उस मकान के लिए मिलने वाले अनुमानित किराये की राशि को अपनी आय में दर्शाना होगा।
source: Dainik Bhaskar.com 

Sunday, January 22, 2012

इनकम टैक्‍स बचाने के 10 तरीके


इनकम टैक्स बचाने की प्‍लानिंग अगर आपने अभी तक नहीं की है तो अब ज्‍यादा वक्‍त नहीं बचा है। अब टैक्स प्लानिंग कर ही लें। इसके लिए कुछ निवेश करना होगा और अगर आप चाहें तो दान भी कर सकते हैं।

इनकम टैक्स कानून के मुताबकि टैक्स बचाने के लिए कुल निवेश एक लाख रुपए तक ही हो सकता है। यानी आप कितनी भी रकम कहीं भी लगाएं, टैक्स में छूट एक लाख रुपए तक के निवेश पर ही मिलेगी। याद रखिए भारत में हर इनकम के लिए टैक्स के स्लैब हैं और इनके अनुसार ही टैक्स लगता है लेकिन टैक्स में विभिन्न निवेशों के जरिये छूट की सीमा एक ही है। धारा 80 सी के तहत निवेशइनकम टैक्स कानून की धारा 80 सी के तहत छूट एक लाख रुपए तक के निवेश पर ही है।

टैक्‍स छूट के लिए निवेश का बेहतर तरीका है पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी पीपीएफ। भारत सरकार के सभी निवेश विकल्पों में यह सबसे अच्छा माना जाता है और इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि आपको पैसे निकलते समय टैक्स नहीं देना पड़ता है। इसमें ब्याज की दर बहुत बढ़िया है यानी 8.6 प्रतिशत और इसमें पूरे एक लाख रुपए तक निवेश किया जा सकता है। 

इसके अलावा जीवन बीमा यानी लाइफ इंश्योरेंस के लिए भी दिए गए पैसे भी एक लाख रुपए की सीमा तक टैक्स छूट के हकदार हैं। पेंशन प्लानों के लिए दी गई रकम भी छूट की हकदार है। कर्मचारियों के लिए बनाई गई राष्ट्रीय पेंशन योजना में भी निवेश करके आप छूट के हकदार हो सकते हैं।

म्युचुअल फंडों के इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम यानी ईएलएसएस में निवेश भी टैक्स में छूट दिला सकते हैं। इसमें 3 साल का लॉक इन पीरियड होता है और यह डायरेक्ट टैक्स कोड लागू होने के बाद खत्म हो जाएगा। राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र यानी नेशनल सेविंग्स स्कीम में भी निवेश करके आप टैक्स में छूट पा सकते हैं। 


बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी के जरिये भी निवेश करके आप टैक्स में छूट पा सकते हैं। लेकिन याद रखिए यह एफडी कम से कम पांच साल की अवधि के लिए होनी चाहिए। 

हाउसिंग लोन को चुकाने में दिए गए मूल धन पर भी टैक्स में छूट मिलेगा। अगर आपने मकान की रजिस्‍ट्री कराई है तो उसमें भी टैक्स छूट है। बच्चों की शिक्षा और ट्यूशन फी पर दी गई रकम भी आपको टैक्स से बचाती है। लेकिन यह सिर्फ दो बच्चों तक ही लागू होती है। 

पोस्ट ऑफिस के जितने भी सेविंग्स स्कीम हैं उन सभी में पैसे लगाकर आप छूट के हकदार हो सकते हैं। धारा 80सीसीएफयह धारा कहती है कि अगर आपने मान्यता प्राप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर बांडों में निवेश किया है तो आपको अधिकतम 30,000 रुपए तक इनकम टैक्स में छूट मिलेगी। धारा 80 डी, के तहत मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियमपर खर्च की गई 35,000 रुपए तक की रकम टैक्स में छूट की पात्र होगी। लेकिन यहां एक पेंच है। अपने आप पर खर्च की गई रकम में सिर्फ 15,000 रुपए पर ही टैक्स में छूट मिलेगी जबकि सीनियर सिटिजन्स के मेडीक्लेम के लिए दिए गए प्रीमियम पर 20,000 रुपए तक की छूट है। यानी अगर आप अपने माता-पिता का मेडिकल इंश्योरेंस कराते हैं तो उस रकम पर भी छूट मिलेगी।

मकान बनाने वालों को टैक्स छूट हाउसिंग के लिए लोन पर दिए गए ब्याज पर भी टैक्स में छूट है और आप इस मद में डेढ़ लाख रुपए तक की छूट पा सकते हैं। यह सभी तरह की छूट के अतिरिक्त है।

अगर आप इससे भी ज्यादा छूट चाहते हैं तो वह भी संभव है। यह संभव होगा ट्रस्ट या इस तरह की संस्थाओं कोदान देकर। यानी अगर आप किसी धार्मिक संस्थान मसलन इस्कॉन या चैरिटेबल संस्थान जैसे रामकृष्ण आश्रम को दान देते हैं तो इस पर भी आपको छूट मिलेगी। इसके अलावा गंभीर रोगों के इलाज में खर्च परइनकम टैक्स में छूट मिलती है। इसी तरह विकलांग व्यक्तियों को भी टैक्स में छूट मिलती है। इसके अलावा खिलाडियों, संगीतज्ञों, लेखकों वगैरह को भी इनकम टैक्स में छूट उपलब्ध है।

 

धारा 80सी के अतिरिक्त भी हैं कर-बचत के विकल्प

मैं 15 फरवरी से पहले आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत कर बचत के लिए निवेश करना चाहता हूं। लेकिन मैं यह तय नहीं कर पा रहा कि किन विकल्पों का चयन करें। कर देनदारी घटाने के उपलब्ध विकल्पों के बारे में कृपया जानकारी दें। -रोहित, पानीपत


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धारा 80सी के तहत निवेश के विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं। जीवन बीमा के प्रीमियम का भुगतान, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, बैंकों के पांच साल वाले फिक्स्ड डिपॉजिट और इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम। इसके अलावा भी कई और विकल्प हैं जैसे बच्चे की स्कूल फीस। इसका लाभ आप तभी उठा सकते हैं जब आपका कोई बच्चा स्कूल जाता हो। हालांकि, इनमें से कई विकल्प आपके दीर्घावधि के लक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं इसलिए कर-बचत की योजना दीर्घावधि के आर्थिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए बनानी चाहिए।

उदाहरण के तौर पर जीवन बीमा की खरीदारी बीमा संबंधी जरूरतों का विश्लेषण करने के बाद ही अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए ली जानी चाहिए। इसी तरह, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में तभी निवेश करना चाहिए जब आप इसके जोखिम-रिटर्न को समझते हों क्योंकि यह शेयरों में निवेश करते हैं।

अगर आप कर-बचत के लिए जल्दबाजी में निवेश कर रहे हैं तो आपको बैंकों का फिक्स्ड डिपॉजिट (पांच वर्ष वाले) या नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में निवेश करें क्योंकि ऐसे में आपके पास नियमित योगदान करने का वक्त नहीं होता है। भविष्य में प्रत्येक वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही कर-बचत की योजना पर काम शुरू कर दें। इससे आपको अतिरिक्त राशि का आवंटन प्रभावी तरीके से करने में मदद मिलेगी जो आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति में भी सहायक साबित होगा।

धारा 80सी के अतिरिक्त आप धारा 80सीसीएफ के तहत लांग टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर बांडों में 20,000 रुपये तक का निवेश कर आयकर में छूट का लाभ पा सकते हैं। इसके अतिरिक्त अपने और माता-पिता के मेडिक्लेम के प्रीमियम के भुगतान पर भी आप धारा 80डी के तहत 40,000 रुपये तक की कटौती का लाभ उठा सकते हैं। लेकिन, कवर पर्याप्त लें ताकि यह आपकी प्राथमिक जरूरत- मेडिकल इमरजेंसी के उद्देश्यों को पूरा करता हो।

मैं शादी-शुदा हूं और अगले दो सालों में पिता बनने की प्लानिंग कर रहा हूं। क्या कोई ऐसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है जो मैटरनिटी के साथ-साथ उसके पहले और बाद में होने वाले खर्चों को कवर करता हो?  -राजवीर सिंह, चंडीगढ़
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अधिकांश मामलों में गर्भावस्था के दौरान होने वाले मेडिकल खर्चों को तभी कवर किया जाता है जब पॉलिसी चार-छह साल से लगातार जारी हो। हालांकि, समय के साथ कुछ कंपनियों ने अपने नये प्रोडक्ट में इस समय-सीमा में थोड़ी कटौती की है। प्रोडक्ट जैसे स्टार हेल्थ की वेडिंग गिफ्ट पॉलिसी एक बच्चे के लिए गर्भावस्था के दौरान होने वाले खर्च को कवर करता है लेकिन शर्त यह है कि आप चार साल की पॉलिसी लें।

इसी तरह मैक्स बुपा की कुछ पॉलिसियां हैं जों गर्भावस्था के खर्च के अलावा एक साल तक बच्चे के टीकाकरण के खर्च को भी कवर करती है। हालांकि, यह लाभ तभी मिल पाता है जब पॉलिसी दो साल से जारी हो और इस तरह के प्रोडक्ट के प्रीमियम भी अधिक हो सकते हैं। अपनी जरूरतों को देखते हुए उपयुक्त प्रोडक्ट का चयन करें। हालांकि, इन सभी प्रोडक्ट की अपनी सीमा है इसलिए मेरी सलाह होगी कि अलग से इसके लिए बचत करें ताकि खर्च के घटने-बढऩे पर कोई परेशानी न हो।

मैंने कुछ वर्ष पहले एक म्यूचुअल फंड में निवेश किया था। उस समय एनएवी 56 रुपये था। लेकिन अब एनएवी घट कर 50.23 रुपये रह गया है। कृपया सलाह दें कि मुझे क्या करना चाहिए?  -कमलेश, इंदौर
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एक इक्विटी म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में विभिन्न सेक्टर के कई शेयर शामिल होते हैं और एनएवी या शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य में इन शेयरों के प्रदर्शन के हिसाब से उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। आपके स्कीम के साथ भी ऐसा ही हुआ है। लेकिन एनएवी के आधार पर किसी म्यूचुअल फंड योजना का अच्छा या बुरा होना तय नहीं किया जा सकता।

किसी भी अच्छे डाइवर्सिफायड पोर्टफोलियो में, स्कीम शेयर बाजार के विभिन्न सेक्टरों में इस तरह निवेश करता है कि किसी खास सेक्टर के बुरे प्रदर्शन की भरपाई दूसरे सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन से हो जाती है। हालांकि, अगर किसी कारणवश शेयर बाजार का प्रदर्शन ही बुरा होता है तो अच्छे फंडों के एनएवी भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहते।

इसके अलावा गौर करने वाली बात यह भी है कि शेयर बाजार में निवेश का लाभ आपको तभी
बेहतर मिलता है जब आप दीर्घावधि के लिए निवेशित रहते हैं। इस दौरान एनएवी में कई बार उतार-चढ़ाव आ सकते हैं लेकिन दीर्घावधि में यह औसत हो जाता है। इसलिए अपने फंड का विश£ेषण आपको विभिन्न मानदंडों के आधार पर करना चाहिए जैसे पोर्टफोलियो कंपोजिशन, जोखिम और रिटर्न का अनुपात, फंड के खर्चे और पोर्टफोलियो में फेरबदल आदि।


इस विधि से आप फंड की अंतर्निहित नीति की जानकारी पा सकेंगे जिससे सह संकेत मिलेगा कि फंड का प्रदर्शन दीर्घावधि में कैसा रहेगा। फंड में निवेश बनाए रखने या उसे बेचने का निर्णय भी आप इस आधार पर ले सकते हैं।

समाधान :- जितेंद्र सोलंकी, सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर, जे. एस. फाइनेंशियल प्लानर्स, दिल्ली
source: Dainik Bhaskar.com 

Saturday, January 21, 2012

आपकी हैंडराइटिंग डिसाइड करती है कि आपको जॉब मिलेगी या नहीं!


नागपुर. व्यक्तित्व को पहचानना हो, या अपराधी को ढूंढ़ना हो, इसके लिए हस्ताक्षर के साथ हैंडराइटिंग बहुत अधिक मायने रखती है। हैंडराइटिंग व हस्ताक्षर व्यक्तित्व की झलक होते हंै। महात्मा गांधी को भी पूरे जीवन भर हैंडराइटिंग अच्छी नहीं होने का अफसोस रहा। जॉब पर भी हैंडराइटिंग व हस्ताक्षर का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

रूतबे में भी हैंडराइटिंग व हस्ताक्षर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कुछ लोग हैंडराइटिंग सुधारने की क्लासेस भी लेते हंै, जिससे 10 से 15 दिनों के अंतर्गत आकर्षक लिखावट बना कर व्यक्तित्व को निखारा जा सकता है। आर्थिक अपराधों में खोजबीन के लिए हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की बहुत अधिक जरूरत पड़ती है।

ग्राफोलॉजी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘ग्राफो’ ग्रीक शब्द है, जिसका अर्थ है लिखावट या राइटिंग और ‘लॉजी’ शब्द का अर्थ है विज्ञान की शाखा। ‘सिगनेचर’ का अर्थ है साइन ऑफ नेचर। अक्षर व हस्ताक्षर बदलकर व सुधारकर आप कई प्रकार से लाभान्वित हो सकते हैं।

यह ग्राफो थैरेपी कहलाता है। अक्षर व साइन सही कर व्यक्तित्व के जरिए आप अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी कम कर सकते हैं। करियर में भी तरक्की पा सकते हैं। आजकल कई बड़ी कंपनियों अपने यहां ग्राफोलॉजिस्ट रखती है। ग्राफोलॉजिस्ट कर्मचारियों की लिखावट विश्लेषित करके मैंनेजमेंट को सुझाव देते हंै। ये सुझाव संस्था के लाभ को बढ़ाने में सहायक होते हंै।

कैसी हो हस्ताक्षर : 1. साइन अधिक लंबे व सुस्पष्ट हो। 2. आप हिंदी में हस्ताक्षर करें या अंग्रेजी में, हस्ताक्षर का पहला अक्षर आकार में सबसे बड़ा, अलग व कलात्मक होना चाहिए। 3. जितनी लंबी साइन, उतनी ही बराबर लंबी व समांतर लाइन साइन के नीचे अवश्य खिंचना चाहिए। 4. साइन करने के बाद या अंत में अनावश्यक (.) बिंदी या (-) मायनस न लगाएं। हस्ताक्षर के नीचे अंडर लाइन करते हंै, तो नीचे एक (.) बिंदी की जगह दो बिंदियां (.) लगाए। इन्हें दो चक्के मना जाता है। यह गुड लक समझा जाता है।

5.
साइन के नीचे राइट का चिन्ह लगाना चाहिए। 6 . शॉर्ट लेटर में जैसे A. A. Ar4ड्ड इस प्रकार से नहीं करना चाहिए। 7. अपना नाम और सरनेम पूरा लिखना अच्छा माना जाता है। 8 . ब्लैक पेन से हस्ताक्षर करें। 9. कैपिटल लेटर में लिखना अच्छा। 10. साइन के पहले अक्षर को गोल न करें। हस्ताक्षर में बहुत बड़ा गोल नहीं होना चाहिए। 11.कभी भी जल्दबाजी में साइन न करें।

कैसी हो लिखावट : 1. नीचे बैठ कर दो तकिया अपने आगे रख कर उस पर लकड़ी का सपाट पाटा रखें। 2. लिखते समय हमेशा हाथ का एंगल 90 डिग्री हो। कॉपी का पोजिशन सीधा हो और शरीर सीधा रखे। 3. टेबल पर लिखते समय आंखों और टेबल में एक फुट का अंतर होना चाहिए। 4. टेबल स्ट्रेट होना चाहिए। पुराने जमाने में दिवानजी की जो पेटी होती थी, वह अगर हो तो बहुत अच्छा होता है। 5. डेक्स और बेंच के बीच आधे फुट का अंतर अवश्य होना चाहिए। यह अंतर नहीं होने पर पीठ, सर, गर्दन व पैर में दर्द देने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। 6. इंक पेन का उपयोग करना चाहिए। काली स्याही से लिखना चाहिए। ज्ञानेश्वरी व दासबोध भी काली स्याही से लिखी हुई है। 7. इंक पेन का उपयोग करते समय माऊथ का सर्कल पेंसिल के जितना होना चाहिए।

कैसे पकडं़े पेन : 1. पेन को अंगूठे और सुकांक के मध्य रख कर मध्य उंगली को पेन के नीचे रखें। 2.उंगलियों को सीधा रखे। 3.लिखते समय उंगलियों को अधिक बेंड नहीं करना चाहिए। 4.उंगलियों पर दबाव नहीं देना चाहिए। इससे हाथ में दर्द होता है और पसीना आता है। 5.पेन पर थोड़ा दबाव देकर लिखना चाहिए। 6 .परीक्षा में तेज गति से लिखना पड़ता है, ऐसे में जो लिखा जा रहा है वह इंस्ट्रुमेंट अच्छा होना चाहिए।

हस्ताक्षर से होती है व्यक्तित्व की पहचान : जो स्पष्ट रूप से अपना नाम लिखते हंै, वे लोग सीधे स्वभाव के होते हंै। जिनकी साइन आर्टिस्टिक शो करती है वे आर्टिस्ट स्वभाव के होते हंै। पूरे अक्षर कैपिटल लेटर में लिखने वाले लोग जिद्दी व समझोता नहीं करने वाले होते हंै।

जो शॉर्ट साइन करते हंै, वे आलसी स्वभाव के होने की संभावना और जल्दबाजी में निर्णय लेने वाले होते हंै। जो बोल्ड लेटर में लिखते हंै उनका स्वभाव सीधा और सोबर होता है ऐसा माना जाता है। बारीक लिखावट वाले स्लो और निर्णय विंलब से लेने वाले होते हंै। जिनके हस्ताक्षर सुदंर होते हैं उन्हें सफलता तो मिलती ही है, साथ ही स्वभाव भी अच्छा होता है।

लाइन के ऊपर लिखने वाले एक्स्ट्राऑडनरी रहते हंै। कुछ हट कर रहने की चाह इनमें होती है। इनमें कॉनफिडेंस बहुत होने के साथ हार्डवर्कि ग भी होते हंै। जिनकी लाइन टूटी रहती है, वे आधे अधूरे काम करने वाले रहते हैं ऐसा समझा जाता है। जो अक्षर के ऊपर लाइन नहीं देते है, उनमें कॉनफिडेंस की कमी होती है।
 Sourc: Bhaskar.com 

Tuesday, January 3, 2012

NIT में पीजी, पीएचडी के ऑप्शन

नआईटीज़ सिर्फ ग्रेजुएशन लेवल की की पढ़ाई के लिए ही नहीं बिल्क पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी लेवल की स्टडी को लिए भी बेहतरीन ऑप्शन उपलब्ध कराते हैं। कई एनआईटी ऐसे हैं जहां पीएचडी के लिए फुल टाइम के साथ पार्ट टाइम की भी व्यवस्था है। कुछेक संस्थान से डिस्टेंस मोड से भी पढ़ाई की जा सकती है।


एनआईटी, जयपुर
मालवीय रिजनल इंजिनियरिंग कॉलेज, जयपुर की शुरुआत 1963 में की गई थी। 26 जून, 2002 को इसे एनआईटी, जयपुर का दर्जा दिया गया। यह संस्थान अंडर ग्रेजुएट, पीजी और पार्ट टाइम कोर्सेज को मिलाकर करीब दो दर्जन कोर्स उपलब्ध कराता है। पीजी लेवल पर यहां 15 से ज्यादा कोर्स हैं। इस इंस्टीट्यूट से आप सिविल इंजिनियरिंग, केमिकल इंजिनियरिंग, इलेक्ट्रिक्ल इंजिनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्युनिकेशन इंजिनियरिंग, आईटी, मैकेनिकल इंजिनियरिंग और मेटलर्जी में चार वर्षीय अंडर ग्रेजुएट कोर्स कर सकते हैं। यहां पांच साल का बी. आर्क. कोर्स भी है।

यहां करीब 10 विषयों में तीन सेमेस्टर के फुलटाइम और पांच सेमेस्टर के पार्ट टाइम पीजी डिग्री प्रोग्राम भी हैं। इंस्टीट्यूट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर इंजिनियरिंग में मैनपॉवर डिवेलपमेंट के लिए वर्ल्ड बैंक, स्विस डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन और भारत सरकार द्वारा फाइनैंस्ड इंपैक्ट स्कीम को लागू किया है।
वेबसाइट: www.mnit.ac.in

एनआईटी, जालंधर
डॉ. बी.आर. आम्बेडकर रिजनल इंजिनियरिंग कॉलेज, जालंघर 1986 से चालू है। इसे 17 अक्टूबर, 2002 को एनआईटी के रूप में अपग्रेड किया गया। संस्थान में एक दर्जन से ज्यादा विभाग हैं। यह केमिकल और बायो-इंजिनियरिंग, सिविल इंजिनियरिंग (स्ट्रक्चरल इंजिनियरिंग और स्ट्रक्चरल मैनेजमेंट), कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजिनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, इंडस्ट्रीयल, इन्स्ट्रूमेंटेशन ऐंड कंट्रोल इंजिनियरिंग, लेदर टेक्नोलॉजी, मैकेनिकल मशीन डिजाइन ऐंड ऑटोमेशन), चीनी और कपड़ा तकनीक जैसे विषयों में चार-वर्षीय अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम चलाता है।

यहां लड़कों के लिए पांच और लड़कियों के लिए एक हॉस्टल की व्यवस्था है। इंस्टीट्यूट में बेहतरीन लायब्रेरी है। साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए अलग से एक सेल की स्थापना की गई ताकि विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर स्टूडेंट्स में एंटरप्रेन्योर कल्चर को बढ़ावा दिया जा सके।
वेबसाइट: www.nitj.ac.in

एनआईटी, जमशेदपुर
रिजनल इंजिनियरिंग कॉलेज, जमशेदपुर की स्थापना 1960 में की गई थी और इसे 27 दिसंबर, 2002 को एनआईटी में बदला गया। इंस्टीट्यूट में एक दर्जन से ज्यादा विभाग हैं। यहां सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, मेटलर्जी और कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजिनियरिंग जैसे प्रमुख विषयों में अंजर ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध हैं। इंस्टीट्यूट से पीजी और एमसीए जैसे कोर्स भी किए जा सकते हैं। यहां बेहतरीन लायब्रेरी भी है।
वेबसाइट: www.nitjsr.com

एनआईटी, कुरुक्षेत्र
रिजनल इंजिनियरिंग कॉलेज, कुरुक्षेत्र की शुरुआत 1963 में की गई थी। एनआईटी का दर्जा इसे 26 जून, 2002 को दिया गया। यहां सिविल, इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्युनिकेशन, इंडस्ट्रीयल, आईटी और कंप्यूटर इंजिनियरिंग जैसे विषयों में अंडर ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध हैं। इन विषयों में यहां पोस्ट ग्रेजुएशन की भी सुविधा है। इंस्टीट्यूट के पास डिवेलप्ड कैंपस और फाइबर ऑप्टिक्स के माध्यम से कम्प्यूटर नेटवर्किंग भी है।
वेबसाइट: www.nitkkr.nic.in

एनआईटी, नागपुर
विश्वेश्वरैय्या नैशनल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, नागपुर की स्थापना 1960 में की गई थी। इसे 26 जून, 2002 को विश्वेश्वरैय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), नागपुर के रूप में अपग्रेड किया गया। यहां एक दर्जन से ज्यादा विभाग हैं जिनके तहत सिविल, केमिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजिनियरिंग, स्ट्रक्चरल इंजिनियरिंग जैसे विषयों में बी. टेक. कोर्स हैं। पांच साल का बी. आर्क. कोर्स भी है। इंस्टीट्यूट पार्ट टाइम और रेग्युलर मोड में करीब डेढ़ दर्जन एमटेक कोर्स भी उपलब्ध कराता है।

यहां इंडस्ट्रीयल मैनेजमेंट में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी है। इंस्टीट्यूट में लड़कों के लिए आधा दर्जन से ज्यादा और लड़कियों के लिए एक हॉस्टल की व्यवस्था है। यहां इंडस्ट्री सेक्टर के साथ तालमेल के लिए एक अलग सेल स्थापित है।
वेबसाइट: www.vnitnagpur.ac.in

एनआईटी, पटना
एनआईटी, पटना मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्थापित 18वां एनआईटी है। इसे पहले बिहार इंजिनियरिंग कॉलेज, पटना के नाम से जाना जाता था। यहां इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्युनिकेशन, आर्किटेक्चर जैसे विषयों में अंडर ग्रेजुएट कोर्स और इलेक्ट्रिक्ल, मैकेनिकल और सिविल इंजिनियरिंग जैसे विषयों में पीजी कोर्स उपलब्ध हैं। इंस्टीट्यूट में हॉस्टल की भी सुविधा है।

लड़कों के लिए तीन, तो लड़कियों के लिए एक हॉस्टल उपलब्ध है। इंस्टीट्यूट कैंपस में सात अनिवार्य सेवाएं यानी 24 घंटे बिजली, पानी, साफ-सफाई, सुरक्षा, चिकित्सा, इमरजेंसी के लिए एंबुलेंस, ईपीएबी एक्स. और इंटरनेट सुविधाएं प्रदान की गई हैं। यहां ई-लायब्रेरी सहित एक आधुनिक लायब्रेरी भी है।
वेबसाइट: www.nitp.ac.in

एनआईटी, रायपुर
गवर्नमेंट इंजिनियरिंग कॉलेज, रायपुर को 1 दिसंबर, 2005 से एनआईटी के रूप में अपग्रेड किया गया। यहां अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज को मिलाकर डेढ़ दर्जन से ज्यादा कोर्स चलाए जा रहे हैं। इंस्टीट्यूट में डिस्टेंस मोड ( दूरस्थ शिक्षा) से भी एजुकेशन की सुविधा है। लेबोरेट्रीज के मामले में यह इंस्टीट्यूट वाकई लाजवाब है। यहां 80 से ज्यादा लेबोरेट्रीज की व्यवस्था है। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। कॉलेज में लड़कियों के लिए एक हॉस्टल समेत करीब आधा दर्जन हॉस्टल हैं। सुसज्जित लाइब्रेरी तो है ही।
वेबसाइट: www.nitrr.ac.in

एनआईटी, राउरकेला
रिजनल इंजिनियरिंग कॉलेज, राउरकेला की शुरुआत 1960 में की गई थी और इसे एनआईटी का दर्जा 26 जून, 2002 को दिया गया। यहां करीब आधा दर्जन विभाग हैं। यह केमिकल इंजिनियरिंग, सिविल इंजिनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग, मैकेनिकल इंजिनियरिंग, मेटलरजी, माइनिंग, एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स और इस्ट्रूमेंटेशन, कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजिनियरिंग व सिरेमिक इंजिनियिरंग जैसे विषयों में अंडर ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध कराता है।

अंडर ग्रेजुएट कोर्सेज में करीब साढ़े चार सौ स्टूडेंट्स को दाखिला मिलता है। यहां करीब आधा दर्जन पीजी कोर्सेज भी चलाए जाते हैं। इसके अलावा एमसीए भी है। लड़कों के लिए छह और लड़कियों के लिए एक हॉस्टल है। यह नैशनल टेक्नोलॉजिकल मैनपॉवर इंफॉर्मेशन सेंटर, उड़ीसा का नोडल सेंटर है। संस्थान ने एनआईटी का दर्जा पाने के बाद 2004-05 में आईआईटी की तर्ज पर शैक्षिक और मूल्यांकन प्रक्रिया को अपनाया है।
वेबसाइट: www.nitrkl.ac.in

एनआईटी, सिल्चर
रिजनल इंजिनियरिंग कॉलेज, सिल्चर 1976 से सेवा में है। 28 जून, 2002 को इसे एनआईटी के रूप में अपग्रेड किया गया। एनआईटी बनने के बाद के बाद इंस्टीट्यूट ने एक सीनेट बोर्ड, अंडर ग्रेजुएशन एजुकेशन बोर्ड और अंडर ग्रेजुएशन प्रोग्राम कमेटी डिपार्टमेंट गठित किया। यहां विभिन्न इंजिनियरिंग विषयों, जैसे सिविल, इलेक्ट्रिक्ल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड टेली कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजिनियरिंग आदि विषयों में बीई/बीटेक अंडर ग्रेजुएशन कोर्स हैं। यहां बेहतरीन लायब्रेरी भी है। जिसमें करीब 70 हजार पुस्तकें हैं। यहां 100 से ज्यादा पत्रिकाएं भी मंगाई जाती हैं। जरूरतमंद स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल सुविधा उपलब्ध है।
वेबसाइट: www.nits.ac.in

एनआईटी, श्रीनगर
रिजनल इंजिनियरिंग कॉलेज, श्रीनगर की स्थापना 1960 में की गई थी। 7 अगस्त, 2003 को इसे एनआईटी बनाया गया। इंस्टीट्यूट में सिविल, इलेक्ट्रिक्ल, इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्युनिकेशन, मैकेनिकल, केमिकल और मेटलर्जी जैसे विषयों में अंडर ग्रेजुएशन कोर्स चलाए जाते हैं। कम्युनिकेशन ऐंड आईटी और मैकेनिकल सिस्टम डिजाइन जैसे विषयों में एमई कोर्स भी हैं। यहां करीब-करीब सभी साइंस डिपार्टमेंट और कुछ इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट में एम. फिल और पीएचडी की भी व्यवस्था है। कैंपस के भीतर इंटरनेट की व्यवस्था है जिससे सभी विभाग जुड़े हुए हैं।
वेबसाइट: www.nitsri.net

Source : http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11352493.cms