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Sunday, August 12, 2012

बड़े ही काम की ये वेबसाइट, दूर कर देंगी मैथ्स में आने वाली प्रॉब्लम्स


क्लास कोई भी हो मैथ्स एक ऐसा विषय है, जो हरेक के लिए आसान नहीं होता। इसे समझने के लिए अभ्यास की जरूरत होती है। साथ ही कहीं उलझने पर पारंगत शख्स की मदद लेनी पड़ती है। स्कूल में तो यह काम टीचर कर देते हैं, लेकिन घर पर.. इसके लिए जानें मैथ्स में मदद करने वाली कुछ वेबसाइट्स के बारे में।

www.mathguru.com   
क्लास 6 से 12 तक के छात्रों को मैथ्स समझाने की व्यवस्था है। अलग-अलग क्लास के हिसाब से प्रश्नपत्र हल करने की भी सुविधा है। इसका उपयोग करने के लिए पहले इस साइट पर स्वयं को इनरोल कराना होगा।

www.math.tifr.res.in
अगर आपने उच्च शिक्षा में मैथ्स ली है, तो यह साइट काम की साबित होगी। यहां प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों द्वारा मैथ्स पर तैयार पेपर समेत रिसर्च भी मिल जाएगी। सर्च आसान बनाने के लिए टॉपिक्स दिए गए हैं।

www.math.mu.ac.in
मैथ्स की अन्य साइट्स के लिंक हैं। ऐसी यूनिवर्सिटी का ब्यौरा भी मौजूद है, जो मैथ्स के लिए जानी जाती हैं। 

www.explore.oneindia.in
मैथ्स की समस्याओं को सुलझाने के साथ इसमें पारंगत होने की टिप्स दी गई हैं। इसमें रीजनिंग और कैलकुलेटिव क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सेट पेपर भी हैं।

www.education.nic.in
प्राइमरी स्तर से मैथ्स समझाने की व्यवस्था है। गणितीय सिद्धांतों के लिए सरल तरीकों का सहारा लिया गया है। चरणबद्ध तरीके से मैथ्स को समझाया जाता है।

Friday, July 20, 2012

Hindi Counting


For people who are interested in couting in hindi. Here is full list of how far you can go
1 Ekai
10 Dahai
100 Saikada
1000 Hazaar
10000 Dus Hazaar
100000 Lakh
1000000 Dus Lakh
10000000 Karor
100000000 Dus Karor
1000000000 Arab
10000000000 Dus Arab
100000000000 Kharab
1000000000000 Dus Kharab
10000000000000 Neel
100000000000000 Dus Neel
1000000000000000 padam
10000000000000000 Dus Padam
100000000000000000 Sunkh
1000000000000000000 Dus Sunkh
10000000000000000000 Maha Sunkh

Wednesday, June 27, 2012

ऑनलाइन सीख रहे लैंग्वेज, तो ये हैं BEST SIX वेबसाइट्स



भोपाल। ग्लोबल एक्सपोजर की चाह और स्टडी से लेकर बिजनेस तक में नॉलेज शेयरिंग के लिए लोग डिफरंट लैंग्वेज सीख रहे हैं। इसके लिए वो कोचिंग ज्वॉइन करने का पारंपरिक तरीका अपनाने के बजाय ऑनलाइन कोर्स को तवज्जो दे रहे हैं। कई वेबसाइट ऐसी हैं जो लैंग्वेज सिखाने के साथ-साथ वहां के एक्सेंट, वे ऑफ टॉकिंग भी सिखाती हैं।

इन ऑनलाइन क्लासेज में वे विदेशी भाषा का ज्ञान लेते हैं और वोकेबलरी , प्रनन्सिएशन भी सीखते हैं। फॉरेन लैंग्वेज से जुड़े एक्सपर्ट कहते हैं कि ये कोर्स कुछ समय के ही होते हैं, साथ ही घर बैठे इन कोर्सेज को आसानी से किया जा सकता है। ग्लोबलाइजेशन के दौर में कंपनीज और एजुकेशन डिपार्टमेंट डिफरंट लैंग्वेज की डिमांड है जिसे पूरा करने यंग प्रोफेशनल्स इन वेबसाइट्स
की मदद लेते हैं।

कोर्स से करते हैं खुद को अपडेट

5 भाषाओं के जानकार लैंग्वेज ट्रेनर आमिर महबूब हर भाषा को अलग-अलग क्षेत्रों के मुताबिक प्रनन्शिएट करना भी बखूबी आता है। वे कहते हैं लैंग्वेज सीखने के साथ-साथ उस देश या क्षेत्र की वोकेबलरी, एक्सेंट, वाइस मॉड्यूलेशन और सबसे अहम बॉडी लैंग्वेज जानना भी बेहद जरूरी होता है। तभी हम उस क्षेत्र के लोगों के साथ अच्छे से मिक्सअप हो सकते हैं।

दो साल पहले तक केवल फॉरेन जाने की इच्छा रखने वाले स्टूडेंट्स ही ब्रिटिश, जर्मन, फ्रेंच आदि लैंग्वेज सीखते थे, लेकिन अब इंडिया की मेट्रो सिटीज में काम करने के लिए भी लोग लैंग्वेज कोर्स कर रहे हैं। मैं खुद भी दूसरे देशों में स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देने जाता हूं, इसलिए खुद को अपडेट करने ऑनलाइन लैंग्वेज कोर्स की हमेशा मदद लेता रहता हूं। इस पर दिए वीडियोज मुझे लैंग्वेज के साथ-साथ वहां के बात करने का तरीका और अभिवादन करने जैसी कई चीजों के तरीके जानने में आसान कर देते हैं।

ग्लोबल एक्सपोजर पाने का आसान तरीका है लैंग्वेज लर्निग

एब्रॉड स्टडी के लिए स्टूडेंट्स को गाइडेंस देने वाले वैदिक इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर विशाल दीक्षित कहते हैं ग्लोबल एक्सपोजर के लिए डिफरंट लैंग्वेज सीखना सबसे हेल्प फुल टूल है। विभिन्न देशों की यूनिवर्सिटीज में जब विजिट करने जाता हूं तो मैं हमेशा वहां की लैंग्वेज के कुछ वाक्य साइट्स के जरिए जरूर सीखकर जाता हूं, ताकि वहां कंफर्टेबल फील कर सकूं। चीन जाना काफी होता है, इसलिए चाइना काफी सीख ली है। इससे मुझे वहां की ज्यादा जानकारियां जुटाने और बाजार की स्थिति समझने में भी मदद मिलती है।

स्टूडेंट विभोर दुबे ने ऑनलाइन बिजनेस इंग्लिश सीखी है। वे बताती हैं कि कॉलेज में इंटर कल्चरल प्रोग्राम नाम का प्रोजेक्ट होता है, जिसमें हम वर्चुअल कंपनी क्रिएट कर दूसरे देशों के स्टूडेंट्स के साथ यह कंपनी चलानी होती है। मुझे यूरोपियन स्टूडेंट्स के साथ यह प्रोजेक्ट करना था। तब मैंने यूरोपियन कंट्रीज की वोकेबलरी, बिजनेस इंग्लिश की टर्मिनोलॉजी, फॉर्मल लैंग्वेज की टर्म्स सीखीं।

सीखने के बाद सिखा रहे जापानी

राष्ट्रीय तकनीक शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के डायरेक्ट विजय अग्रवाल कुछ साल पहले एजुकेशनल टूर पर जापान गए। वहां के प्रोफेसर्स अंग्रेजी के साथ-साथ जापानी में भी बात करते जिससे वे कई बार उनकी बातों का जवाब नहीं दे पाता थे। तब उन्होंने वहीं पर जापानी सीखना शुरू की। इसके बाद भारत वापस आया तो उन्हें लगा कि अपनी मातृभाषा में ही बात करना पसंद करने वाले जापानियों से नॉलेज शेयरिंग के लिए उनकी भाषा सीखना चाहिए। तब उन्होंने जापानी ऑनलाइन सीखना शुरू की। अब वे बहुत अच्छी जापानी बोलने के साथ-साथ लिख लेते हैं और स्टूडेंट्स को सिखाते हैं।

लैंग्वेज सीखने के लिए वेबसाइट्स 



Friday, June 15, 2012

बड़े काम का छोटा पुदीना

पुदीने का पौधा कहीं भी किसी भी जमीन, यहां तक कि गमले मेे भी आसानी से उग जाता है। यह गर्मी झेलने की शक्ति रखता है। इसे किसी भी ऊर्वरक की आवश्यकता नहीं पड़ती है। थोड़ी सी मिट्टी और पानी इसके विकास के लिए पर्याप्त हैं। पुदीना को किसी भी समय उगाया जा सकता है। इसकी पत्तियों को ताजा तथा सुखाकर प्रयोग में लाया जा सकता है।

यूं करें इस्तेमाल
सलाद में इसका उपयोग स्वास्थ्यवर्द्धक है। प्रतिदिन इसकी पत्ती चबाई जाए तो दंत क्षय, मसूढ़ों से रक्त निकलना, पायरिया आदि रोग कम हो जाते हैं। यह एंटीसेप्टिक जैसा कार्य करता है और दांतों तथा मसूढ़ों को जरूरी पोषक तत्व पहुंचाता है।

एक गिलास पानी में पुदीने की चार से पांच पत्तियां डालकर उबालें। ठंडा होने पर फ्रिज में रख दें। इस पानी से कुल्ला करने पर मुंह की दुर्गध दूर हो जाती है।

पुदीना कीटाणुनाशक है। यदि घर के चारों तरफ पुदीने के तेल का छिड़काव कर दिया जाए तो मक्खी, मच्छर, चींटी आदि कीटाणु भाग जाते हैं।

पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लेप करने से, भाप लेने से, मुहांसे, चेहरे की झाइयों और दागों में लाभ 
होता है।

एक टब में पानी भरकर उसमें कुछ बूंद पुदीने का तेल डालकर यदि उसमें पैर रखे जाएं तो थकान से राहत मिलती है और बिवाइयों के लिए बहुत लाभकारी है।

पुदीने का ताजा रस क्षय रोग, अस्थमा और विभिन्न प्रकार के श्वास रोगों में बहुत लाभकारी है।

पानी में नींबू का रस, पुदीना और काला नमक मिलाकर पीने से मलेरिया के बुखार में राहत मिलती है।

हकलाहट दूर करने के लिए पुदीने की पत्तियों में काली मिर्च पीस लें तथा सुबह शाम एक चम्मच सेवन करें। 

हिचकी की शिकायत होने पर इसकी पत्तियों को चूसने से या इसके रस को शहद के साथ लेने से राहत मिलती है।

पुदीने की चाय में दो चुटकी नमक मिलाकर पीने से खांसी में लाभ मिलता है।

हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त हैजा हो तो आधा कप रस हर घंटे के अंतराल पर रोगी को पिलाएं।

पुदीने का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से ज्वर दूर हो जाता है तथा न्यूमोनिया से होने वाले विकार भी नष्ट हो जाते हैं।

पेट में अचानक दर्द उठता हो, तो अदरक और पुदीने के रस में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करे। 

नकसीर आने पर प्याज और पुदीने का रस मिलाकर नाक में डाल देने से नकसीर के रोगियों को बहुत लाभ होता है।

Thursday, June 14, 2012

बिजली की समस्या है तो उठाइए फोन और डायल कीजिए ये नंबर!

अजमेर.शहरवासी बिजली संबंधी समस्याओं के लिए अब सीधे शिकायत दर्ज करा सकेंगे। डिस्कॉम की ओर से शिकायत दर्ज करने के लिए कई केंद्र बनाए गए हैं। साथ ही लोग एईएन स्तर के इंजीनियरों को अपनी परेशानी से अवगत करा सकेंगे। एक्सईएन मुकेश ठाकुर ने शहरी क्षेत्र के सभी एईएन एवं जेईएन को तत्काल शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।

इन नंबरों पर दर्ज करा सकेंगे शिकायत: 

हजारी बाग सब डिवीजन-1 में 2460911, एईएन 9413391614, हाथीभाटा सब डिवीजन-2 में 2440480, एईएन 9413391615,सब डिवीजन-3 में 2431708 एईएन 9413391616, वैशाली नगर सब डिवीजन-5 में 2641797 एईएन 9413391619, शास्त्री नगर सब डिवीजन में 2432603 एईएन 9414068413, परबतपुरा सब डिवीजन-4 में 2695297, एईएन 9413391618,मेयो कॉलेज सब डिवीजन 2660797 एईएन 9414068369, मदार सब डिवीजन में 2670763 तथा एईएन 9413391620 के नंबरों पर शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी।

Monday, May 7, 2012

दालचीनी का देहाती नुस्खा....15 मिनट में आर्थराइटिस का दर्द दूर


भारत में आर्थराइटिस की बढ़ती समस्या के पीछे जीवनशैली में बदलाव एक बड़ा कारण है। मॉर्डन लाइफ स्टाइल, काम का कोई समय नही और काम के लिए दिन-रात एक जैसे। ऐसे में अधिकतर लोग कम उम्र में आर्थराइटिस के चक्कर में रहे हैं। आर्थराइटिस से परेशान लोगों के लिए नीचे एक देसी नुस्खा बताया जा रहा है जो कि यह आर्थराइटिस की समस्या में रामबाण है

-  आर्थराइटिस का दर्द दूर भगाने में शहद और दालचीनी का मिश्रण बड़ा कारगर है। एक चम्मच दालचीनी पाउडर लें। इसे दो तिहाई पानी और एक तिहाई शहद मिला लें। इस लेप को दर्द वाली जगह पर लगाएं। 15 मिनट में दर्द गायब हो जाएगा।



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शहद के साथ दालचीनी पाउडर लेने पर पेट के दर्द से राहत मिलती है। ऐसे लोग जिन्हें गैस की समस्या है उन्हें शहद और दालचीनी पाउडर बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करना चाहिए।



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आधा लीटर चाय में तीन चम्मच शहद और तीन चम्मच दालचीनी मिलाकर पीएं। दो घंटे के भीतर रक्त में कोलेस्ट्राल का स्तर घट जाता है।
- दालचीनी त्वचा को निखारती है तथा खुजली के रोग को दूर करती है।



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रात को सोते समय नियमित रूप से एक चुटकी दालचीनी पाउडर शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।

Sunday, March 25, 2012

यहां होता है करिश्मा... डुबकी लगाते ही गायब हो जाते हैं 'दाग'!

बांदा।बुंदेलखण्ड में कई ऐसे प्राकृतिक संसाधन हैं जो मानव जीवन के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। बांदा जिले के तुर्रा गांव की बिसाहिल नदी में एक ऐसा पाताली जलधारा का कुंड है, जिसका पानी पीने या स्नान मात्र से बड़ा से बड़ा चर्म रोग ठीक हो जाता है। चिकित्सक और वैज्ञानिक भी इस करिश्माई जल में घुले तत्वों की खोजबीन करने में नाकाम हैं।


चित्रकूट के हनुमानगंज के जंगल में बने 'करका आश्रम' के जलकुंड के पानी में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को ठीक करने के गुण पाए जाते हैं। यह कुंड विंध्यश्रृंखला की पहाड़ी से निकले एक झरने में बना है।

बांदा जिले के तुर्रा गांव की बिसाहिल नदी में पाताली पानी को एकत्र करने के लिए बनाया गया एक कुंड आम लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। 10 साल पहले इलाहाबाद राजमार्ग संख्या-76 में निर्माण किए जा रहे पुल के खम्भे की खुदाई से फूटी पाताली जलधारा ने जहां सूखी नदी को पानी से लबालब कर दिया, वहीं राज्य सेतु निर्माण निगम को काम रोकने के लिए भी मजबूर कर दिया था।

बाद में निर्माण एजेंसी को इस पुल का निर्माण पचास मीटर की दूरी पर अन्य जगह कराना पड़ा। गांव के लोगों ने गर्मी में पानी की कमी को दूर करने के लिए चंदे से जुटाई रकम से इस जलधारा को एक पक्के कुंड में बदल दिया और जलस्रोत में लोहे का पाइप लगा दिया। इस पाइप से निकल कर पानी कुंड में एकत्र होता है और राहगीरों के अलावा आस-पास के ग्रामीण इसका उपयोग करते हैं।

कुछ साल पहले भयंकर चर्म रोग से पीड़ित एक राहगीर ने इस कुंड में स्नान किया तो उसे काफी फायदा मिला। तभी से हर शनिवार को यहां चर्म रोगियों की भीड़ जमा होने लगी, जो अनवरत जारी है। तुर्रा गांव के प्रधान पति संतोष वर्मा ने बताया, "अब तो दूर-दराज से चर्म रोगी यहां स्नान करने आते हैं और अपने साथ कुंड का पानी ले जाते हैं।"

इसी गांव के पूर्व प्रधान रजुवा शिवहरे ने बताया, 'गर्मी में नदी का पानी सूख जाता है, पर कुंड की जलधारा बहती रहती है। यहां का पानी चर्म रोगियों के लिए रामबाण दवा है, एक्जिमा, अपरस, खुजली जैसी गंभीर बीमारी के रोगी यहां स्नान करने आते हैं।"

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) बांदा के.एन. श्रीवास्तव ने बताया, "ऐसे पाताली जलस्रोतों में धातु या जड़ी-बूटी का मिश्रण होता है, जिससे कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं। इस कुंड के पानी की जांच कराकर पता किया जाएगा कि इसमें कौन सा तत्व घुला हुआ है।"

राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय एवं महाविद्यालय अतर्रा के प्राचार्य डॉ एस.एन. सिंह ने बताया, "यह जल स्रोत भूगर्भ की किसी धातु से टकरा कर बाहर निकलता है, जिसके घोल से चर्म रोगियों को निजात मिलती है।"