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Sunday, November 2, 2014

इन 6 ऐप के जरिए बात करके कम करें फोन का बिल

ऑनलाइन चैटिंग और विडियो कॉल ने तमाम दूरियां मिटा दी हैं। नेट से कनेक्ट होते ही सेकंड भर में आप किसी से भी रू-ब-रू हो सकते हैं और इससे आपके फोन का बिल भी कम होगा। इस मामले में गूगल हैंगआउट्स पॉप्युलर ऑप्शन है। कैसे करें इसका इस्तेमाल बता रहे हैं बालेंदु शर्मा दाधीच और अमित मिश्रा:

बात जब ऑनलाइन चैटिंग की हो, तो गूगल हैंगआउट्स बड़े काम की चीज है। इसे इस्तेमाल करने के लिए बुनियादी जरूरत हैं - दोनों तरफ इंटरनेट कनेक्शन, वेब कैमरा, माइक्रोफोन, स्पीकर और गूगल की मेंबरशिप यानी गूगल अकाउंट। इसके लिए सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होती। पहली बार विडियो कॉल करने से पहले इंटरनेट से आपके ब्राउजर में एक प्लग-इन इंस्टॉल करना होता है, जो एकाध मिनट का काम है। स्मार्टफोन या टैबलट पर हैंगआउट्स इस्तेमाल करने के लिए ऐप डाउनलोड करने की जरूरत पड़ती है।

कैसे करें सेटअप
1. अपने वेब कैमरे, स्पीकर, माइक्रोफोन और इंटरनेट कनेक्शन को स्विच ऑन करें।
2. जीमेल अकाउंट से लॉगइन करें।

3. जीमेल के वेब पेज पर लेफ्ट में सबसे नीचे देखें। गूगल हैंगआउट्स का आइकन दिखाई देना चाहिए। दिखाई दे रहा है, तो क्लिक करके आगे बढ़ें, नहीं तो चौथा चरण पूरा करें।
4. जीमेल के वेब पेज में लेफ्ट साइड में मेल से जुड़े ऑप्शन के साथ-साथ यूजर का आइकन दिखाई देता है। इसे क्लिक करें, जिससे एक मेन्यू खुलेगा। Try the new hangouts पर क्लिक करने से गूगल हैंगआउट्स आइकन ऐक्टिव हो जाएगा।
5. अब गूगल हैंगआउट्स के आइकन पर क्लिक करें। इसे एक बार क्लिक करने पर आपके दोस्तों की लिस्ट दिखती है और दोबारा क्लिक करने पर वह सूची छिप जाती है।
6. इसमें कुछ दोस्तों के नाम और फोटो दिखाई दे रहे होंगे। ये ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कभी आपको विडियो चैट के लिए निमंत्रण भेजा था। आप चाहें तो इनके फोटो पर क्लिक कर उनके साथ विडियो चैट सेशन शुरू कर सकते हैं।
7. आपको जिस व्यक्ति के साथ बात करनी है, वह इस लिस्ट में नहीं है, तो अपने फोटो के साथ दिख रहे लेंस के आइकन पर क्लिक करें। यहां आप अपने दोस्तों को सर्च करके विडियो चैट के लिए न्योता भेज सकते हैं। जैसे ही संबंधित व्यक्ति का नाम सर्च रिजल्ट में दिखाई दे, उसके नाम के साथ लगे बॉक्स पर क्लिक करें।
8. अब एक छोटा-सा बॉक्स दिखेगा, जिसमें विडियो कॉल का चिह्न बना होगा। इसे क्लिक करने पर आप विडियो कॉल सेशन शुरू कर पाएंगे।
9. यहां एक नई विंडो खुलेगी, जिसमें आपसे हैंगआउट्स का प्लग-इन इंस्टॉल करने को कहा जाएगा। Install Plug-in बटन दबाएं।
10. प्लग-इन इंस्टॉल होते ही विडियो कॉल की विंडो सामने आएगी। आपसे कॉल शुरू करने को कहा जाएगा, जिसे Join बटन दबाकर किया जा सकता है।
11. अब खुलने वाले छोटे-से बॉक्स में Invite बटन दिखाई देगा और उस व्यक्ति का नाम भी, जिसे आपने विडियो कॉल के लिए चुना था। यह बटन दबाएं। गूगल उस यूज़र को मेसेज भेज देगा और अगर वह आपके साथ विडियो कॉल में दिलचस्पी रखता है तो वह आपके साथ ऑनलाइन चैटिंग शुरू कर सकता है। यहां आप चाहें तो अन्य लोगों को भी इस कॉल में जोड़ सकते हैं।

गूगल हैंगआउट्स पर सिर्फ विडियो कॉल्स ही नहीं होते। आप चाहें तो टेक्स्ट मेसेज, फोटो भी भेज सकते हैं। जरूरी नहीं कि दोनों तरफ के लोग एक जैसी डिवाइस का ही इस्तेमाल कर रहे हों। एक यूज़र कंप्यूटर के जरिए, दूसरा स्मार्टफोन, तीसरा आइपैड के जरिए भी ग्रुप विडियो कॉल का हिस्सा बन सकता है।

और भी हैं हैंगआउट जैसे

Skype : पुराना है लेकिन हिट है
- इसने ही सबसे पहले विडियो कॉलिंग को दुनिया के सामने मॉडर्न और यूजर फ्रेंडली तरीके से पेश किया। इसे अब माइक्रोसॉफ्ट ने खरीद लिया है, लेकिन इसका रूप-रंग कमोबेश पहले की तरह ही है।
- आपको स्काइप पर जाकर अपना एक आईडी क्रिएट करना होगा। इसी के सहारे आप लोगों के इन्वाइट अक्सेप्ट भी कर सकते हैं।
- चैटिंग और पिक्चर भेजने के ऑप्शन मिलते हैं।
- यह पहले से ही काफी अच्छा काम करता रहा है, लेकिन जब से विंडोज ने इसे खरीदा लिया है, विंडोज़ डिवाइस पर यह खासा अच्छा काम करता है।
- विडियो की पिक्चर क्वॉलिटी यह सिग्नल स्ट्रेंथ के हिसाब से खुद-ब-खुद सेट कर लेता है इसलिए कमजोर या स्लो इंटरनेट पर भी यह अच्छा काम करता है।
- बात करते वक्त स्क्रीन पर केवल माइक, विडियो जैसे काफी कम ऑप्शन ही नजर आते हैं, जिससे एक्स्पीरिएंस बेहतर होता है।
- इसका मोबाइल ऐप भी काफी अच्छा है, लेकिन यह हाई स्पीड नेटवर्क पर बेहतर काम करता है।

ooVoo: चलता है जादू
- ओवो नाम भले ही अजीब लगे लेकिन विडियो चैट की दुनिया में यह भी जाना-माना नाम है।
- कई लोगों से एक साथ बात करने के लिहाज से यह काफी अच्छा ऐप्लिकेशन है।
- इसमें एक साथ 12 लोगों (6 विडियो और 6 ऑडियो चैट) से बात की जा सकती है।
- इसमें विडियो इफेक्ट जैसे ऑप्शन दिए गए हैं, जिनसे बात करते हुए आप स्क्रीन पर अपने चेहरे को अलग-अलग कैरक्टर्स में तब्दील कर सकते हैं।
- हाई डेफिनेशन विडियो के साथ चैट करने के लिहाज से यह बेहतर ऐप्लिकेशन साबित होता है।
- यहां पर विडियो कॉल रिकॉर्ड भी कर सकते हैं।

Tango : सुपर फ्रेंडली
- इस पर आप इंस्टेंट मेसेजिंग के साथ-साथ विडियो चैट भी कर सकते हैं।
- इसमें फोटो एडिटिंग के साथ ही फोटो शेयरिंग का ऑप्शन भी है, जो इसे और भी कूल बनाता है।
- टैंगो पर मौजूद गेम्स को आप डाउनलोड कर सकते हैं और मनचाहे वक्त पर इन्हें खेल सकते हैं।
- टैंगो दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के भी आपके कॉन्टैक्ट खंगालकर आपके सामने पेश करता है।

Fring :
मल्टि-प्लैटफॉर्म ऐप होने की वजह से अन्य सोशल मीडिया ऐप्स से कॉन्टैक्ट्स को यहां लाना आसान। साथ ही कम स्पीड में बेहतर परफॉर्मेंस।

Qik :
इन नए ऐप्लिकेशन में आप अपने विडियो चैट को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लाइव स्ट्रीम कर सकते हैं।

Source: नवभारत टाइम्स 

मेमरी कार्ड के बनें एक्सपर्ट

बीएस पाबला 
मेमरी कार्ड के इस्तेमाल को लेकर कई बार उलझन की स्थिति का सामना करना पड़ जाता है। इस छोटी-सी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के मायाजाल को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं हम:

फ़्लैश मेमरी कार्ड या सॉलिड स्टेट फ्लैश मेमरी डेटा स्टॉरेज जैसे नामों से जाना जाने वाला मेमरी कार्ड डिजिटल कॉन्टेंट को इकट्ठा करके रखने वाली एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है। आज-कल इसका इस्तेमाल मोबाइल फ़ोन्स, डिजिटल कैमरा, म्यूज़िक प्लेयर और विडियो गेम जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है। इसमें दर्ज़ हुई डिजिटल जानकारियां मिटाई जा सकती हैं, दोबारा डाली जा सकती हैं और उनमें जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। कंप्यूटर, लैपटॉप से कनेक्ट हो सकने वाली पेन ड्राइव से यह मेमरी कार्ड आकार, प्रकार में अलग होता है और जिन डिवाइस में इसका इस्तेमाल होता है, उनमें इसके लिए एक स्थान निश्चित होता है। तकनीक की दुनिया में इसे Non-volatile SD Card कहा जाता है। SD का मतलब है Secure Digital और Non-volatile का मतलब है कि इसे अपनी याददाश्त के लिए किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत की ज़रूरत नहीं है।

तीन तरह के कार्ड 
मेमरी कार्ड तीन तरह के होते हैं। ये हैं: SD, SDHC और SDXC

SD 
- इसे मेमरी कार्ड की पहली पीढ़ी माना जाता है। इस कार्ड की मोटाई आमतौर पर 2.1 मिलीमीटर होती है और इसकी अधिकतम क्षमता होती है 2 GB
- इस तरह के मेमरी कार्ड तीन आकारों में आते हैं। पहला है मूल SD, जो सीधे अपने लिए बने खांचे में फिट हो जाता है। बाकी दो अपेक्षाकृत छोटे आकार के आते हैं, जिन्हें miniSD, microSD कहते हैं। इन्हें एक अडॉप्टर की मदद से संबंधित खांचे में लगाया जा सकता है।
- आमतौर पर SD कार्ड्स का इस्तेमाल पर्सनल कम्प्यूटर्स, विडियो कैमरा, डिजिटल कैमरा और ऐसे ही बड़े आकार के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में किया जाता है, जबकि miniSD, microSD को मोबाइल, टैबलट जैसे छोटे डिवाइस में इस्तेमाल किया जाता है।

SDHC 
दूसरी जेनरेशन के मेमरी कार्ड 2006 में आए, जिन्हें SDHC कहा गया। SDHC कार्ड का मतलब है Secure Digital High Capacity कार्ड। आकार में तो यह SD कार्ड जैसे ही होते हैं, लेकिन इनकी क्षमता 4GB से 32GB तक होती है। इनमें भी अपेक्षाकृत छोटे आकार के कार्ड miniSD, microSD कहलाते हैं।

SDXC 
मेमरी कार्ड की तीसरी जेनरेशन 2009 में आई, जिसे SDXC कहा गया। SDXC का मतलब Secure Digital extended Capacity है। इनकी क्षमता 48GB से 2TB तक होती है। (व्यावहारिक तौर पर अभी केवल 128GB की क्षमता ही आम लोगों के लिए उपलब्ध है। इसका छोटा आकार केवल microSD ही है। वैसे अब इनके UHS (Ultra High Speed bus) और SDIO (Secure Digital Input Output) प्रारूप भी आ गए हैं। UHS 1 और UHS 3 फॉर्मैट वाले मेमरी कार्ड भी आ गए हैं, जो ज्यादातर व्यावसायिक उपकरणों में यूज होते हैं।

मेमरी कार्ड की स्पीड 
मेमरी कार्ड की स्पीड एक अहम फीचर है। इसे इस बात से नापा जाता है कि मेमरी कार्ड में कितनी स्पीड से एक फोटो जैसी डिजिटल जानकारी सहेजी जा सकती है या निकाली जा सकती है। कई बार आपने देखा होगा कि कैमरा, किसी फोटो को सहेजते हुए कुछ ज़्यादा ही समय ले लेता है, बिज़ी का संकेत देता रहता है या किसी विडियो को देखते हुए बार-बार रुकावट आती है। दरअसल, मेमरी कार्ड वाला हर डिवाइस एक खास स्पीड वाले कार्ड के लिए बना होता है। उससे कम स्पीड वाला मेमरी कार्ड लगा हो तो वह अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगा। हममें से ज़्यादातर लोग इस पर कोई खास ध्यान नहीं देते। अक्सर लोग जो डिवाइस 16GB तक की मेमरी कार्ड के लिए बना है, उसमें 8GB/16GB का कार्ड डलवा लेते हैं, लेकिन कार्ड की स्पीड पर ध्यान नहीं देते। तो अगली बार अगर आपको लगे कि आपका कैमरा फोटो लेने के बाद उसे स्टोर करने में ज्यादा समय ले रहा है या कैमकॉर्डर किसी विडियो को लेते समय ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो बेहतर होगा कि पहले यह देख लें कि मेमरी कार्ड की स्पीड, डिवाइस के हिसाब से ठीक है या नहीं। मेमरी कार्ड में Class 2 सबसे धीमी और Class 10 सबसे तेज़ स्पीड होती है। अब अगर आपके कैमरे की क्षमता Class 4 वाले मेमरी कार्ड की है तो Class 4 मेमरी कार्ड का इस्तेमाल करना ही समझदारी है। इससे ज्यादा स्पीड वाले कार्ड का इस्तेमाल कोई मायने नहीं रखता, क्योंकि कैमरा ज्यादा स्पीड वाले कार्ड की क्षमता का सदुपयोग कर ही नहीं पाएगा। ध्यान देने की बात यह है कि एक ही स्टॉरेज कपैसिटी (जैसे 16GB) वाले कार्ड की स्पीड जितनी बढ़ती जाएगी, उसकी कीमत भी उतनी ही बढ़ती जाएगी।

कैसे जानें कार्ड की स्पीड
हो सकता है कि कार्ड पर एमबी/सेकंड में स्पीड लिखी हो। अगर ऐसा नहीं है, तो आप कार्ड की गति की पहचान कार्ड पर बने चिह्नों से कर सकते हैं। कार्ड पर एक अधूरे गोले में 2 लिखे होने का मतलब है क्लास 2, जिससे कम से कम 2 एमबी/सेकंड की स्पीड मिलेगी। इसी तरह 4, 6, 10 का मतलब क्लास 4, क्लास 6 और क्लास 10 है, जिनसे कम से कम 4, 6 और 10 एमबी/सेकंड की स्पीड मिलेगी। U जैसे चिह्न के भीतर 1 या 3 लिखे होने से कम से कम 10 और 30 एमबी/सेकंड की उम्मीद मिलेगी।

मेमरी कार्ड की सुरक्षा 
- कई बार हम गलती से अचानक ही मेमरी कार्ड से गाने, फोटो या कोई डेटा मिटा डालते हैं। जब तक गलती का अहसास हो, तब तक बात बिगड़ चुकी होती है या फिर मेमरी कार्ड के डेटा से कोई छेड़छाड़ ना हो जाए, ऐसा भी ख्याल आता है।

- इस गड़बड़ी से बचने के लिए कई आधुनिक सॉफ्टवेयर हैं, जो किसी कोड या पासवर्ड द्वारा मेमरी कार्ड के डेटा तक अवांछित पहुंच को रोकते हैं। कुछ कमांड भी इस काम को बखूबी कर देते हैं।

- किसी तरह की अनजानी भूल से बचने का एक आसान रास्ता है। मेमरी कार्ड के किनारे सरकने वाला एक छोटा-सा टुकड़ा रहता है, जिसे Lock स्थिति की ओर खिसका दिया जाए, तो उस कार्ड में न कोई डेटा डाला जा सकेगा, ना ही कुछ निकाला जा सकेगा। Unlock करने के लिए उसे वापस सामान्य स्थिति पर रखा जा सकता है।

कुछ और बातें 
- मेमरी कार्ड कभी गड़बड़ा जाए तो समस्या होती है कि उसे कैसे ठीक करें। इसके लिए SD Card Recovery Tool जैसे कई सॉफ्टवेयर हैं।
- मेमरी कार्ड से कभी कोई डेटा मिट जाए तो उसे वापस लाने के Undelete 360, Recuva जैसे ढेरों सॉफ्टवेयर हैं।
- विभिन्न प्रयोगों/ट्रिक के लिए Memory Cards Tools, Memory Card Manager का इस्तेमाल किया जा सकता है।

Source: नवभारत टाइम्स 

हार्ड कॉपी को ऐसे करें सॉफ्ट में कन्वर्ट

मान लीजिए आपके पास 10-12 पेज का कोई लेख है, जो पेपर पर लिखा है और आपको उसकी सॉफ्ट कॉपी चाहिए। ऐसे में क्या आप 10-12 पेज दोबारा टाइप करने बैठेंगे? नहीं, यह काम आप अपने गूगल ड्राइव के जरिये कर सकते हैं। कैसे बता रहे हैं बालेंदु शर्मा दाधीच:

ऐसी और खबरें तुरंत पाने के लिए हमें ट्विटर 
@NbtTech पर फॉलो करें।

कम लोगों को यह जानकारी है कि जब वे किसी अच्छे ब्रैंड का स्कैनर या फिर एमएफडी (मल्टी फंक्शनल डिवाइस) खरीदते हैं तो उसके साथ एक सॉफ्टवेयर भी मिलता है, जिसका नाम है- ऑप्टिकल कैरक्टर रेकग्निशन (ओसीआर)। आमतौर पर हम स्कैन किए जाने वाले दस्तावेजों को इमेज या पीडीएफ फॉर्मैट में कंप्यूटर में सहेजते हैं, लेकिन ओसीआर सॉफ्टवेयर की मदद से उन्हें टेक्स्ट फॉर्मैट में भी स्टोर किया जा सकता है। ये दस्तावेज थोड़े-बहुत संशोधनों के बाद उसी तरह इस्तेमाल किए जा सकते हैं जैसे आपने उन्हें कंप्यूटर में खुद टाइप किया हो। बाकायदा एडिटिंग कीजिए, काटिए, जोड़िए, कहीं भी पेस्ट कीजिए। पूरी तरह से एक टेक्स्ट फाइल की तरह से इन्हें आसानी से यूज किया जा सकता है।

वैसे यह सेवा ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। अच्छी बात यह है कि ऑनलाइन यह सेवा सिर्फ अंग्रेजी ही नहीं बल्कि हिंदी और दूसरी तमाम भाषाओं में भी मिलती है। इसी की बदौलत गूगल और दूसरी ऑनलाइन पुस्तक सेवाएं लाखों किताबों को डिजिटल रूप में परिवर्तित करती हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो फिर भला आप इस सुविधा का फायदा क्यों नहीं उठाते?
गूगल ड्राइव के जरिए OCR
हालांकि स्कैनर और एमएफडी के साथ आमतौर पर आपको एक अलग ओसीआर सॉफ्टवेयर मिलता है, जिसका इस्तेमाल डॉक्युमेंट स्कैन करते समय किया जा सकता है, लेकिन ऐसे कंप्यूटर यूजर्स की संख्या बहुत कम है, जिनके पास स्कैनर या एमएफडी हों। वैसे भी कुछ सस्ते स्कैनर और एमएफडी के साथ ओसीआर सॉफ्टवेयर नहीं मिलता। ऐसे यूज़र्स इंटरनेट के जरिए उपलब्ध गूगल की ओसीआर सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो उसकी दूसरी सेवाओं की ही तरह मुफ्त है और इस्तेमाल में आसान। पहले यह सेवा गूगल डॉक्स का हिस्सा हुआ करती थी लेकिन अब डॉक्स और ड्राइव दोनों को एक ही प्लैटफॉर्म में समाहित कर दिया गया है।

गूगल के वेब ओसीआर का इस्तेमाल करने के लिए आपके पास गूगल का अकाउंट होना चाहिए। दूसरी जरूरत ऐसे दस्तावेज की है, जिसे स्कैन किया गया हो। याद रहे, गूगल ड्राइव की यह सुविधा हिंदी की फाइल को बदलती तो है, लेकिन सारा मटीरियल गड़बड़ हो जाता है। सभी शब्द उलट-पुलट हो जाते हैं जिन्हें ठीक करना पड़ता है।

गूगल ओसीआर का इस्तेमाल करने के लिए यह प्रोसेस अपनाएं :
1. drive.google.com पर लॉगिन करें।
2. अब खुलने वाले पेज पर आपकी वे सभी फाइलें दिखाई जाएंगी, जिन्हें आपने कभी गूगल ड्राइव पर अपलोड किया होगा। यदि वहां कोई फाइल नहीं दिख रही तो इसका मतलब है- आपने अब तक कोई फाइल अपलोड नहीं की है।
3. सबसे पहले गूगल ड्राइव वेब पेज के राइट साइड में Settings वाले आइकन को क्लिक करें और वहां दिखने वाले विकल्पों में Upload Settings पर क्लिक करें।
4. अब एक और मेन्यू खुलेगा, जिसमें Convert Text from uploaded PDF and Image files पर क्लिक कर उसे सलेक्ट कर लें।
5. अब गूगल के मुख्य लोगो (ऊपर लेफ्ट में) के पड़ोस में अपलोड बटन पर जाएं।
6. इसे क्लिक करने पर फाइलों को अपलोड करने के लिए एक छोटा सा मेन्यू उभरेगा, जिसमें Files पर क्लिक करें।
7. अब फाइल अपलोड करने वाला डायलॉग बॉक्स खुलेगा, जिसके जरिए आप अपने कंप्यूटर में मौजूद पीडीएफ या इमेज फाइल को, जो स्कैन की गई है या फिर किसी अन्य स्रोत से हासिल की गई है, अपलोड कर दें।
8. फाइल अपलोड होने की प्रक्रिया दिखाने वाला बॉक्स खुलेगा, जिसमें अपलोड की प्रॉसेस दिखेगी। प्रॉसेस पूरी होने पर Upload Complete का संदेश दिखाई देगा।
9. फाइल अपलोड होने के बाद आपकी फाइलों की सूची में दिखाई देगी।
10. चूंकि आपने शुरुआत में ही गूगल ड्राइव को निर्देश दे दिया था कि इस दस्तावेज को टेक्स्ट फॉर्मैट में बदलना है, सो यह दस्तावेज अब अपने बदले हुए फॉर्मैट में डाउनलोड किए जाने के लिए तैयार है।
11. अब हम इसी फाइल को पीडीएफ नहीं बल्कि टेक्स्ट फॉर्मैट में डाउनलोड करेंगे। इसके लिए फाइल को सिलेक्ट करें और ऊपर More मेन्यू पर क्लिक करें। यहां नीचे की ओर Download विकल्प दिखाई देगा। इसे क्लिक करें।
12. फाइल डाउनलोड होने से पहले Convert And Download डायलॉग बॉक्स सामने आएगा, जिसमें आप दस्तावेज को किस रूप में डाउनलोड करना चाहते हैं, उसके विकल्प दिखाए जाएंगे। आप देख सकते हैं कि यहां पर HTML, Plain Text, Microsoft Word Document आदि विकल्प हैं। इनमें से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड या प्लेन टेक्स्ट विकल्प को चुनें और दस्तावेज को डाउनलोड कर लें।
13. अब अपने दस्तावेज को संबंधित टेक्स्ट एडिटर, माइक्रोसॉफ्ट वर्ड या नोटपैड आदि में खोलकर देखें। पीडीएफ या इमेज दस्तावेज का मैटर टाइप किए गए मैटर में तब्दील हो चुका है।

याद रहे, गूगल ड्राइव की यह सुविधा फिलहाल हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं है। हिंदी में यही काम कैसे हो, यह हम कुछ समय बाद बताएंगे।

Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

अपने गैजट्स में जोड़िए फंक्शन, बनाइए बेहतर

आप अपने पास मौजूद कई गैजट्स (स्मार्टफोन, टैबलट, वाई-फाई राउटर, कैमरे) में ऐसे फीचर्स जोड़ सकते हैं, जिनकी सुविधा कंपनी ने नहीं दी है। इसके लिए बस आपको थोड़ा सा दिमाग लगाने की जरूरत होती है। बाकी हितेश राज भगत और करण बजाज बता देते हैं कि इसे आप कैसे कर सकते हैं, आगे क्लिक करते जाइए और जानिए...

ऐसी और टिप्स तुरंत पाने के लिए हमें ट्विटर 
@NbtTech पर फॉलो करें।

आपका मल्टिफंक्शनल स्मार्टफोन
क्या आपके लैपटॉप में वेबकैम नहीं है? तो आपको फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है। फ्री ऐंड्रॉयड ऐप ड्रॉइडकैम के जरिए आप फोन के कैमरे और माइक्रोफोन का इस्तेमाल कर स्काइप, गूगल हैंगआउट और बाकी प्लैटफॉर्म पर दोस्तों से बात कर सकते हैं। इसके लिए फ्री ऐप और फ्री विंडोज़, लाइनक्स सर्वर सॉफ्टवेयर चाहिए। इसके बारे में आपको विस्तार से जानकारी http:www.dev47apps.com पर मिल सकती है।

वाई-फाई रेंज दुगनी-तिगुनी करिए
वाई-फाई एक अजीब साइंस है। आप ठीक-ठीक नहीं पता लगा सकते कि आपका वाई-फाई कहीं पर क्यों कमजोर होता है, लेकिन आप कुछ गाइडलाइंस के मुताबिक काम करके वाई-फाई की रेंज बढ़ा सकते हैं। बेहतर कवरेज के लिए राउटर को घर के बीचो-बीच रखिए और इसे 6 फीट या इससे ज्यादा की ऊंचाई पर रखिए। ऐसा इस वजह से क्योंकि वाई-फाई सिग्नल ओमनी-डायरेक्शनल होते हैं और वे ऊपर जाने की जगह नीचे की तरफ आते हैं। अगर आपके पास दो ऐंटेना वाला राउटर है, तो एक को वर्टिकल रखिए, दूसरे को हॉरिजनटल। अगर आप ये न कर सकें या इन तरीकों से फायदा न हो, तो रेंज बढ़ाने के लिए पुराने राउटर्स को वाई-फाई सिग्नल रिपीटर्स के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं या आप किसी इलेक्ट्रिकल आउटलेट में सीधे लगाने के लिए डीलिंक और नेटगियर जैसे ब्रैंड्स के छोटे रिपीटर्स (कीमत करीब 1500 रुपए) खरीद सकते हैं। रिपीटर अपने नेटवर्क की सीमा पर लगाएं, जिससे वह वहां से सिग्नल को आगे भेज सके। इसे लगाना बहुत आसान होता है। इसमें रिपीटर मोड चुनिए, अपने वाई-फाई नाम और पासवर्ड को डालिए, बस हो गया। आप दुगना या तिगुना या आउटडोर तक सिग्नल पहुंचाने के लिए और रिपीटर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अपने कैमरे की क्षमता बढ़ाइए
किसी कैमरे से RAW फॉर्मैट की इमेज उस तस्वीर का डिजिटल नेगेटिव होता है। सही सॉफ्टवेयर की मदद से आप RAW इमेज को बेहतर प्रोसेस कर सकते हैं, ताकि आपको अच्छी तस्वीर मिल सके। आम तौर पर डीएसएलआर कैमरों में RAW का ऑप्शन होता है। कई मिड-रेंज और एंट्री लेवल कैमरों में यह नहीं होता, जबकि कई बार उनका हार्डवेयर इसे सपॉर्ट करता है। आप एक टेंपररी फर्मवेयर (एक तरह का सॉफ्टवेयर) की मदद से आप अपने कैमरे को ऐसा ऐसा बना सकते हैं कि वह RAW इमेज ले सके और आपको कुछ अतिरिक्त सेटिंग्स दे सके। कैनन के कैमरे रखने वाले लोग http://chdk.wikia.com/wiki/CHDK से फ्री CHDK (Canon Hack Development Kit) ले सकते हैं। आप अपने कैमरा मॉडल को सर्च करिए और सही फर्मवेयर डाउनलोड कर लीजिए। इसमें स्टेप-बाई-स्टेप बताया गया है कि कैमरे में फर्मवेयर कैसे लोड करें। एक बार फर्मवेयर अपडेट होने के बाद आप RAW ऑप्शन के अलावा कई और सेटिंग्स देख सकेंगे। यह ध्यान रखिएगा कि RAW इमेज सेव करने में ज्यादा वक्त और ज्यादा जगह लगती है। कैनन डीएसएलआर यूज़र मैजिक लैंटर्न नाम का फर्मवेयर ले सकते हैं। इससे वे अपने EOS कैमरे में और फंक्शनैलिटी डाल सकते हैं। इससे लाइव हिस्टोग्राम, फोकस पीकिंग, स्पॉटमीटर, एचडीआर विडियो, अनकम्प्रेस्ड रॉ विडियो सपॉर्ट, मोशन डिटेक्शन जैसे कई फीचर मिलेंगे. सपोर्टेड डीएसएलआर कैमरों की लिस्ट के लिए www.magiclantern.fm पर जा सकते हैं।

वायरलेस हार्ड ड्राइव और प्रिंटर
वाई-फाई शेयर करने का शानदार जरिया है। लिहाजा आपके पास मौजूदा प्रिंटर (नॉन-वायरलेस) या एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव है, तो आपको इन बिल्ट यूएसबी पोर्ट और प्रिंट सर्वर से लैस राउटर लेना चाहिए। मिसाल के तौर पर बेल्किन का प्लेमैक्स एन600 (8,000 रुपए) वाई-फाई एन सर्टिफाइड राउटर है और ड्यूल यूएसबी पोर्ट भी है। साथ ही, इसे परंपरागत वायरलेस राउटर की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आप इसमें एक साथ यूएसबी हार्ड ड्राइवर और यूएसबी प्रिंटर कनेक्ट कर सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि इस नेटवर्क पर कोई भी कंप्यूटर घर में किसी जगह से प्रिंट करने में सक्षम होगा। साथ ही, हार्ड ड्राइव में मौजूद कॉन्टेंट का भी ऐक्सेस मुमकिन होगा।

टीवी का वायरलेस विडियो सिग्नल
अगर आपको अपने स्टाइलिश एलईडी-एलसीडी टीवी के केबल के कारण आने वाली खड़खड़ाहट पसंद नहीं है, तो आप अपने टीवी को वायरलेस बना सकते हैं। आपको अपनी मौजूदा डिवाइसेज़ (मसलन केबल सेट टॉप बॉक्स, डीवीडी प्लेयर और गेम कंसोल) के लिए वायरलेस एडीएमआई अडॉप्टर खरीदना होगा। इसके बाद टीवी के एचडीएमआई पोर्ट में रिसीवर और बाकी डिवाइस में ट्रांसमीटर लगाना होगा। वायरलेस एवी ट्रांसमीटर और रिसीवर की कॉस्ट 4,000 लेकर 65,000 रुपए तक बैठती है। कॉन्टेंट (फोटो, म्यूजिक, विडियो) की स्ट्रीमिंग के लिए मौजूदा वाई-फाई कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए स्मार्टफोन या टैबलट जैसी डिवाइस से टीवी को जोड़ने के लिए डीएलएनए टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आईपैड को बनाइए दूसरा डिस्प्ले
आईपैड का डिस्प्ले काफी शानदार है। चाहे आप आईपैड 2 इस्तेमाल करें या फर्स्ट जेनरेशन आईपैड मिनी, डिस्प्ले की क्वॉलिटी काफी बेहतरीन है। इस वजह से आपको इसे अपने कंप्यूटर के लिए दूसरे डिस्प्ले की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। यह ट्रिक विंडोज़ और मैक दोनों पर काम करती है। इसके लिए सबसे पहले यह पक्का करें कि कंप्यूटर और आईपैड दोनों एक ही वाई-फाई नेटवर्क से जुड़े हों। साथ ही, एयर डिस्प्ले 2 (9.99 डॉलर) या डिस्प्लेपैड (2.99 डॉलर) और कंप्यूटर के लिए संबंधित सर्वर ऐप लेना होगा। यह ऐप आपके आईपैड को वायरलेस सेकंड डिस्प्ले में बदल देगा, जो एक्सटेंडेड डिस्प्ले हो सकता है।

हिंदी में छपे पेजों की खुद होगी टाइपिंग यानी हार्ड कॉपी से सॉफ्ट कॉपी

बालेंदु शर्मा दाधीच
इसके पहले हमने आपको गूगल ड्राइव के जरिए 
अंग्रेजी की स्कैन फाइलों को टेक्स्ट फॉर्मैट में बदलने का तरीकाबताया था। अब हम बता रहे हैं दो ऐसे तरीके, जिनसे आप हिंदी की हार्ड कॉपी को सॉफ्ट कॉपी में बदल सकते हैं।

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स्कैन किए गए दस्तावेजों को टेक्स्ट फॉर्मैट में बदलने की गूगल की सुविधा सिर्फ अंग्रेजी तक सीमित नहीं है। यह करीब तीन दर्जन भाषाओं में उपलब्ध है, जिनमें हिंदी भी शामिल है। हालांकि हिंदी के इमेज-आधारित दस्तावेजों को कन्वर्ट करने पर हासिल होने वाले टेक्स्ट में बहुत गलतियां होती हैं। इसकी भारी प्रूफ रीडिंग करनी होगी। ऐसे में हिंदी में गूगल ड्राइव की ओसीआर सुविधा ज्यादा व्यावहारिक महसूस नहीं होती।

गूगल ड्राइव के अलावा कुछ और ओसीआर सॉफ्टवेयर हैं, जो हिंदी को ठीक-ठाक सपोर्ट करते हैं। इनमें वेब आधारित ओसीआर सर्विसेज भी शामिल हैं और कंप्यूटर में इन्स्टॉल होने वाले सॉफ्टवेयर भी।

www.i2ocr.com वेबसाइट दूसरी भाषाओं के साथ-साथ हिंदी टेक्स्ट रिकॉग्निशन की सुविधा भी देती है। यह पीडीएफ दस्तावेजों को नहीं पहचानती, इसलिए अपने दस्तावेज को स्कैन करने के बाद इमेज फाइल फॉर्मैट में सेव करें, जैसे jpg, bmp, png वगैरह। यह सुविधा फ्री में उपलब्ध है। IndSenz नाम की विदेशी कंपनी के डिवेलपर ओलिवर हेलविग की तरफ से विकसित IndSenz Hindi OCR सॉफ्टवेयर साधारण फॉर्मैटिंग वाले हिंदी टेक्स्ट के रिकॉग्निशन का काम बखूबी करता है, लेकिन यह फ्री नहीं है। आइए, देखते हैं ये दोनों सर्विसेज कैसे काम करती हैं :

वेब आधारित OCR

1. सबसे पहले 
www.i2ocr.com/free-online-hindi-ocr पर जाएं।

2. नीचे की तरफ, जहां Let's OCR लिखा है, वहां Step 1 के तहत आपकी स्कैन फाइल को अपलोड करने की सुविधा मौजूद है। अपलोड करने के लिए कंप्यूटर में मौजूद स्कैन इमेज फाइल को चुन लें।

3. अब वेबसाइट पर Step 2 पर नजर डालें। यहां Hindi भाषा चुनी हुई होनी चाहिए। नहीं है, तो हिंदी को सिलेक्ट कर लें।

4. अब Step 3 पर मौजूद Extract Text बटन दबाएं, जिससे आपकी फाइल के अपलोड होने और उसके भीतर मौजूद टेक्स्ट को पहचानने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

5. इसी वेब पेज पर दो बॉक्स खुल जाएंगे। इनमें से लेफ्ट वाले बॉक्स में टेक्स्ट दिखाई देगा। इस टेक्स्ट को कॉपी कर अपने कंप्यूटर में खुली हुई वर्ड फाइल में पेस्ट कर लें। अब जरूरत के लिहाज से एडिट कर लें।

6. आप देख सकते हैं कि सामान्य फॉर्मैटिंग वाले हिंदी टेक्स्ट का 90 फीसदी शुद्धता के साथ कन्वर्जन हो जाता है। अगर संबंधित इमेज फाइल आपके कंप्यूटर में नहीं बल्कि किसी वेबसाइट पर है तो यहां उसका वेब अड्रेस देकर सीधे टेक्स्ट कन्वर्जन मुमकिन है।

सॉफ्टवेयर के जरिए कन्वर्जन

इंडसेन्ज़ कंपनी की तरफ से विकसित हिंदी ओसीआर सॉफ्टवेयर को 
www.indsenz.com वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। इसे आजमाने के लिए फ्री वर्जन डाउनलोड किया जा सकता है, हालांकि वह सिर्फ सॉफ्टवेयर की क्षमताओं का प्रदर्शन भर करता है। फ्री वर्जन के जरिए इमेज फाइल से निकाला गया टेक्स्ट इस्तेमाल करना संभव नहीं है, क्योंकि इसे न तो फाइल की शक्ल में सेव किया जा सकता है और न ही कट-कॉपी-पेस्ट के जरिए ही सॉफ्टवेयर से बाहर ले जाया जा सकता है। बहरहाल, ट्रायल वर्जन अपनी क्षमताओं का बखूबी प्रदर्शन कर देता है। अगर आप इसका दफ्तर के काम-काज में नियमित रूप से इस्तेमाल करने के इच्छुक हैं तो आपको पेड वर्जन खरीदना होगा। इसके दो पेड वर्जन हैं। सामान्य वर्जन की कीमत करीब 12 हजार रुपए है, जबकि प्रफेशनल वर्जन करीब 16 हजार रुपए का पड़ेगा।

कैसे काम करता है

1. सबसे पहले 
indsenz.com से हिंदी ओसीआर सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर कंप्यूटर में इन्स्टॉल करें। अब सॉफ्टवेयर को लॉन्च करें।

2. इसके फाइल मेनू में Open Images पर क्लिक करें।

4. अब खुलने वाले डायलॉग बॉक्स में अपनी स्कैन फाइल को चुन लें। यहां इमेज के साथ-साथ पीडीएफ फाइल को भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

5. सॉफ्टवेयर के ऊपरी हिस्से में टूलबार में बने बटनों पर नजर डालें। यहां लेंस के आइकन वाले बटन पर माउस ले जाने पर Start the text recognition दिखाई देगा। इस बटन को क्लिक करे।

6. इससे इमेज फाइल में मौजूद टेक्स्ट को पहचानने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पहचाने गए टेक्स्ट को नीचे की ओर मौजूद बॉक्स में दिखाया जाएगा।

7. आप देख सकते हैं कि इस बॉक्स में माउस का कर्सर दिखाई दे रहा है और इस टेक्स्ट को सिलेक्ट करना मुमकिन है। जाहिर है, यह इमेज नहीं बल्कि टाइप किए हुए मैटर जैसा है।


Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

Wednesday, September 3, 2014

महँगी दवाइयों के समकक्ष, दूसरी सस्ती जेनेरिक दवाईयों (Generic Medicines) को ऑनलाइन (Online) कैसे सर्च (Search) करें ?

आजकल ज्यादातर डॉक्टर्स जो दवाईयां प्रीस्क्राइब्ड (prescribed) करते है, उनका महंगा होने के पीछे, कंपनियों की तरफ से डॉक्टर्स को मिलने वाला मोटा कमीशन या इंसेंटिव भी एक बड़ा कारण होता है | इसको आप ऐसे भी देख सकते है कि अगर हम समान रासायनिक लवणों (Salt) और सूत्र वाली वही दवा किसी कम पोपुलर कंपनी या बिना ब्राण्ड की (generic) दवा लेते है, तो काफी सस्ती पड़ती है |
ये बात पहले से पब्लिक डोमेन में है, इस पर सरकार भी जोर देती रहती है कि जेनेरिक दवाईयों को बढ़ावा दिया जाये, पर भारी बाजारवाद के चलते, आखिर में सब ‘आम आदमी’ को ही झेलना पड़ता है |
यहाँ मैं दूसरी बात ये भी कहना चाहूँगा कि आप शुरू में ही अपने डॉक्टर से ही आग्रह करें कि वो जेनेरिक मेडिसिन ही प्रीस्क्राइब करे, साथ अपने डॉक्टर की सलाह के बिना मैं यहाँ किसी दवा को अपने आप बदलने के लिए मैं यहाँ बिलकुल नहीं कहने वाला हूँ, यहाँ मैं जो वेबसाइट बताने वाला हूँ, उनसे आप जानकारी ले सकते है, अंतिम निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर विमर्श कर ले |

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MedIndia.net पर आप मेडिसिन को जेनेरिक नाम के आधार, कंपनी के आधार पर उसके दूसरे समकक्ष मेडिसिन सर्च कर सकते हो, हाँ इस साईट पर विज्ञापनों और इसका यूजर इंटरफ़ेस की वजय से आपको थोड़ी से असुविधा हो सकती है , विज्ञापन  तो आपAdblock Plus Browser Add-on की मदद से हटा सकते हैं |

2. logoMyDawai:  
इस वेबसाइट का खास फीचर ये है कि इसके मोबाइल एप्लीकेशन भी है, जैसे एंड्राइड, एप्पल और फेसबुक एप्प , और दूसरा इसका वेब डिजाईन भी मोबाइल डिजाईन जैसा ही है, उसके साथ ही यहाँ पर जेनेरिक मेडिसिन, और दवाई निर्माता के नाम से भी सर्च कर सकते है |

3. MIMS.com    
1005811_10152433808939260_3589841348867010368_nMIMS.com का डेटाबेस (Database) सबसे ज्यादा प्रचलित और पोपुलर है, अपने देश में, मैं इसको यहाँ क्रम में थोडा नीचे इसीलिए रखा, क्योंकि इसकी इस्तेमाल करने के लिए आपको अपना अकाउंट रजिस्टर ( जो फ्री है ) जरूरी है | रजिस्ट्रेशन के बाद, आप इसे यूज करके देखिये, ये एक बेहतर विकल्प है, जहाँ आपको मेडिसिन से सम्बंधित कई और जरूरी जानकारियां भी मिलती है |

4. Getdavai header_logo: इस साईट का डेटा (Data) का स्त्रोत का तो पता नही, पर यहाँ से पोपुलर मेडिसिन ब्रान्ड्स के समकक्ष दूसरी कंपनियों की मेडिसिन के नाम तथा कीमत बढ़ी आसानी से सर्च कर सकते है |

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HealthKartPlus.com के भी मोबाइल एप्लीकेशन है, जो काफी मददगार साबित हो सकते है, साथ ही इस वेबसाइट हा यूजर इंटरफ़ेस और डिजाईन काफी बढ़िया है, और फीचर्स भी सभी है , कुल मिलाकर ये भीं एक बेहतर साईट है |
source:http://www.techtouch.co/2014/08/generic-medicines-online-search.html

Indian Police Station All Information

यदि आप भारत के किसी भी स्थान के पुलिस स्टेशन के निम्न संपर्क सूत्र जानना चाहते है, जैसे
  • कण्ट्रोल रूम नंबर
  • पुलिस स्टेशन फोन नंबर 
  • SHO मोबाइल नंबर
  • ईमेल आई डी
  • पुलिस स्टेशन नाम
  • इत्यादि 
तो "संपर्क" नाम से बनाई गयी इस सेवा से आप अपने जिले, राज्य या स्टेशन के नाम से सर्च करके वहाँ के पुलिस स्टेशन के फोन व् अन्य संपर्क सूत्र जान सकते है.

ये सेवा निम्न वेबसाइट पर उपलब्ध है: